कोरबा। मानिकपुर बस्ती में संचालित “कल्लू मटन दुकान” को लेकर उठे सवाल अब फुसफुसाहट नहीं रहे—ये सीधे प्रशासन की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिह्न बनकर खड़े हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि दुकान के सामने खुलेआम बकरों का वध किया जाता है और उनका खून व अवशेष पास के बरसाती नाले में बहा दिए जाते हैं। बरसात के दिनों में यही नाला मानिकपुर बड़ा पोखरी में जा मिलता है और वहीं से जल शोधन संयंत्र के माध्यम से पानी एसईसीएल कॉलोनी के हजारों घरों तक सप्लाई किया जाता है।
लोगों के बीच यह सवाल तेज़ी से गूंज रहा है—क्या एसईसीएल कॉलोनी के परिवार वही पानी पीने को मजबूर हैं जिसकी राह में कथित रूप से स्लॉटर का खून और गंदगी बह रही है ? यदि आरोपों में सच्चाई है, तो यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ है।
नियम किताबों में, ‘खुला स्लॉटर’ जमीन पर ?
नगर पालिक निगम द्वारा बुधवारी क्षेत्र में लाखों रुपये खर्च कर मांस विक्रेताओं के लिए बंद भवन में व्यवस्थित स्थान उपलब्ध कराया गया है। निगम के नियमों के अनुसार खुले में मांस बिक्री और पशु वध प्रतिबंधित है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि यदि मानिकपुर में खुलेआम पशु वध हो रहा है, तो संबंधित अधिकारियों की नजर अब तक क्यों नहीं पड़ी ?
स्थानीय रहवासियों का दावा है कि दुकान के आसपास बदबू, गंदगी और नाले में बहते लाल रंग के पानी का दृश्य आम हो चुका है। लोगों का कहना है कि यह कोई एक-दो दिन की बात नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रही गतिविधि है। यदि ऐसा है, तो निरीक्षण और निगरानी की व्यवस्था आखिर कहां है ?
राजनीतिक संरक्षण की चर्चा
क्षेत्र में यह चर्चा भी जोरों पर है कि दुकान संचालक साहिल कुरैशी का जुड़ाव Indian National Congress से रहा है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि इसी कारण प्रशासनिक सख्ती नहीं दिखाई जा रही। हालांकि इस संबंध में न तो कोई आधिकारिक पुष्टि हुई है और न ही संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया सामने आई है।
फिर भी जनता के बीच सवाल उठ रहा है—क्या राजनीतिक पहचान कानून से ऊपर है ? क्या नियमों का पालन व्यक्ति देखकर तय होगा ?
जलस्रोत और स्वास्थ्य पर मंडराता खतरा ?
यदि किसी भी प्रकार का जैविक अपशिष्ट खुले नाले के माध्यम से जलस्रोत तक पहुंचता है, तो जलजनित बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ सकता है। क्या पानी के सैंपल की नियमित लैब जांच हो रही है ? क्या स्वास्थ्य विभाग और प्रदूषण नियंत्रण एजेंसियों ने मौके पर निरीक्षण किया ? इन सवालों का जवाब फिलहाल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
धार्मिक संवेदनशीलता भी मुद्दा
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि दुकान के पास एक प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। उनका आरोप है कि खुले में पशु वध से उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं। उनका सवाल है कि क्या प्रशासन इस पहलू को भी नजरअंदाज कर रहा है ?
जनता की मांग—जांच और कार्रवाई
मानिकपुर के रहवासियों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जाए, जलस्रोत से पानी के सैंपल लेकर परीक्षण कराया जाए और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि यह केवल एक दुकान का मामला नहीं, बल्कि कानून के समान अनुपालन और सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा का सवाल है।
अब निगाहें नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन पर टिकी हैं। क्या इस बार शिकायतों पर कार्रवाई होगी, या फिर मामला भी अन्य विवादों की तरह फाइलों में सिमट जाएगा ? शहर जवाब चाहता है।
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