नियमों की उड़ रही धज्जियांः बिना फिल्टर लगाए हो रहा डामर प्लांट का संचालन

जन स्वास्थ्य व पर्यावरण पर असर

कोरबा 05 फरवरी। जन स्वास्थ्य और पर्यावरण को ठेंगा दिखाते हुए डामर प्लांट का संचालन एक बार फिर से शुरू कर दिया गया है। कृषि महाविद्यालय के विद्यार्थियों सहित आसपास के इलाके के लोग प्लांट से निकलने वाले धुआ से परेशान है। इन गतिविधियों पर नियंत्रण न होने से सिस्टम पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

कटघोरा में जर्जर जेन्जरा बाईपास का निर्माण कराना तय किया गया। इसके लिए प्रशासन की ओर से वर्क आर्डर जारी किया गया । इस कड़ी में ठेकेदार ने लखनपुर सुधर्रा के पास डामर प्लांट स्थापित किया है। नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए इस काम को किया जा रहा है। सरकारी कृषि कॉलेज के नजदीक चल रहे प्लांट में कॉन्ट्रेक्टर ने पर्यावरण मानकों को ध्यान में रखना बिल्कुल जरूरी नही समझा। पिछले दिनों लीगों ने इस तरह की गतिविधियों पर आपत्ति दर्ज कराई थी। कहां गया था कि यहां से निकलने वाले धुआ के कारण कृषि कॉलेज के विद्यार्थियों सहित आसपास के लोगों के स्वास्थ्य और क्षेत्र की कृषि संपदा पर विपरीत असर पड़ रहा है। खबरों पर संज्ञान लेने के साथ प्रशासन ने प्लांट को बंद करा दिया। उसके संचालक को कहा गया था कि फिल्टर की व्यवस्था कराई जाए तब प्लांट का संचालन संभव हो सकेगा। हैरानी की बात यह है कि ठेकेदार ने प्लांट में फिल्टर लगाने की व्यवस्था नहीं की ताकि धुआ का फैलाव कम से कम हो और समस्या को नियंत्रित किया जा सके। वर्तमान में पुरानी व्यवस्था के तहत प्लांट शुरू कर दिया गया है जिससे समस्याएं फिर खड़ी हो गई। बायपास निर्माण में लगने वाले मटेरियल में डामर की अपनी भूमिका है। प्रतिदिन बड़ी मात्रा यहां से तैयार की जा रही है। यह आसपास के पर्यावरण को मुश्किल में डाल रही है। अगर अधिकारियों के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं हुआ है तो कम से कम इस तरह की दुव्यवस्थाओं की रोकथाम के लिए आवश्यक प्रयास करने की दिशा में ध्यान दिया जाना चाहिए।

सडक निर्माण एवं मरम्मत कार्य के दौरान उपयोग किए जाने वाले डामर (कोलतार) से निकलने वाला धुआं लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। डामर से उठने वाले जहरीले धुएं के संपर्क में आने से सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार डामर के धुएं से आंख, नाक और गले में जलन, खांसी, सिरदर्द और चक्कर जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से फेफड़ों पर स्थायी असर पड़ सकता है, वहीं कुछ मामलों में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की आशंका भी जताई गई है। डामर के धुएं का असर बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं पर अधिक देखा जा रहा है। अस्थमा और सांस की बीमारी से पीडि़त लोगों की परेशानी इसमें और बढ़ जाती है।

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